लोन पर कार का झंझट नहीं पसंद, तो लीज पर खरीद लें गाड़ी, इंश्योरेंस से लेकर सर्विस तक में मिलेगा बेनिफिट

हाइलाइट्स

लीज पर कार खरीदना है बेहतर ऑप्शन.
डाउनपेमेंट का झंझट हो जाता है खत्म.
लोन और ईएमआई का भी टेंशन नहीं.

Car On Lease: आजकल हर कोई कार खरीदना चाहता है. कई लोग कार की पूरी कीमत चुकाकर उसे खरीद लेते हैं तो कई लोन लेकर कार खरीदने का सपना पूरा करते हैं. हालांकि, कई लोग ऐसे भी हैं जो डाउनपेमेंट, लोन, ईएमआई, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस के झंझट में पड़े बगैर कार खरीदना चाहते हैं. अगर आप भी इनमें से एक हैं तो हम ऐसा तरीका बता रहे हैं, जिसकी मदद से आप कम खर्चे और बिना झंझट आसान किश्तों में कार ले सकते हैं.

आपको बता दें कि आजकल लोन के बजाय लीज पर कार खरीदना भी बेहतर ऑप्शन है. लीज ऑप्शन उन लोगों के लिए भी कहत काम का है, जो आपकी कार से बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं या हर एक-दो साल में गाड़ी बदल लेते हैं. ये ऐसा ऑप्शन है जिसमें कार का इस्तेमाल करने के बदले में आपको फिक्स मंथली फीस भरनी होगी. कार लीज पर लेने के लिए आपको कुछ बातों को जरूर नोट कर लेना चाहिए…

  • अपने बजट और जरूरतों को समझें. ये तय करें कि आप कितना पैसा खर्च करने के लिए तैयार हैं और आपको किस तरह की कार की जरूरत है.
  • कार डीलर या लीजिंग कंपनी से कॉन्टैक्ट करें. आपको कई अलग-अलग डीलर्स या लीजिंग कंपनियों से बात करनी चाहिए और उनके ऑफर्स की तुलना करनी चाहिए.
  • लीज कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करें. एक बार जब आप एक डीलर या लीजिंग कंपनी से कॉन्ट्रेक्ट कर लेते हैं, तो आपको लीज कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने की जरूरत होगी.

हालांकि, लीज पर कार खरीदने के अपने कुछ फायदे और नुकसान भी हैं, जिन्हें आपको जरूर जान लेना चाहिए.

कार लीज पर लेने के फायदे
लीज पर ली गई कार के लिए मंथली पेमेंट आमतौर पर कार लोन ईएमआई की तुलना में कम होती है.
आपको कार खरीदने के लिए डाउन पेमेंट करने की जरूरत नहीं होती है.
आपको कार के मेंटेनेंस और रिपेयरिंग की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.

कार लीज पर लेने के नुकसान
लीज नियम के अनुसार आप कार के मालिक नहीं होंगे.
आपको लीज पीरियड (कॉन्ट्रैक्ट) खत्म होते ही आपको कार वापस करनी होगी.
आपको कुछ एक्स्ट्रा कॉस्ट की पेमेंट करनी पड़ सकती है, जैसे कि डैमेज फीस और रेंज लिमिटेशन.

लोन और लीज में अंतर
जब आप लीज पर कार लेते हैं तो आपको हर महीने एक फिक्स चार्ज देना होता है. यह वैसा ही होता है जैसे आप किसी सर्विस का इस्तेमाल करने के लिए सब्सक्रिप्शन चार्ज या रेंट का भुगतान करते हैं. जबकि लोन की किश्तें बैंक इंट्रेस्ट रेट के हिसाब से घटती बढ़ती रहती हैं.लीज की सब्स्क्रिप्शन फीस के अलावा
आपको कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है. इंश्योरेंस और मेंटेनेंस जैसी चीजें फिक्स सब्स्क्रिप्शन में शामिल होती हैं.

वहीं लोन पर ली हुई कार के लिए ये सारे खर्चे आपको अलग से उठाने पड़ते हैं. लीज पर ली हुई कार पर आपको टैक्स बेनिफिट भी मिलता है. 5 साल तक आपकी गाड़ी की सर्विसिंग भी फ्री रहती है. वहीं लोन पर ली हुई कार के मामले में ऐसा नहीं है.

Tags: Auto News, Cars

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