एसयूवी गाड़ियां पैदल चलने वालों के लिए खतरनाक! इसे न दें बढ़ावा जानिए Global NCAP चीफ ने क्यों कही ये बात

हाइलाइट्स

ग्लोबल एनसीएपी चीफ ने किया बड़ा खुलासा.
एसयूवी गाड़ियों से गंभीर दुर्घटना का खतरा ज्यादा.
भारत में बढ़ता एसयूवी का चलन चिंताजनक.

नई दिल्ली. भारत में एसयूवी की डिमांड दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं. इंडियन मार्केट में जितनी तरह की एसयूवी बेच जा रही हैं वो शायद ही किसी और देश में बेचीं जा रही हों. यहां आपको मिनी, माइक्रो, कॉम्पैक्ट सब-कॉम्पैक्ट और फुल साइज एसयूवी गाड़ियां मिल जाएंगी. इससे ग्राहकों को अलग-अलग साइज और अपने बजट के हिसाब से एसयूवी चुनने का मौका मिलता है. हालांकि, बड़े साइज की एसयूवी की बिक्री और प्रमोशन को लेकर ग्लोबल एनसीएपी के अध्यक्ष डेविड वार्ड ने जो बात कही है वो चौंकाने वाली है और बड़ी गाड़ियों का बाजार खत्म कर सकती है.

दरअसल, उन्होंने भारत में एसयूवी गाड़ियों को रोड सेफ्टी के लिए खतरनाक बताया है. उन्होंने कहा है कि एसयूवी की वृद्धि और मांग सड़क सुरक्षा और पर्यावरण के संदर्भ में महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करती है. सड़क दुर्घटना के मामले में भारत टॉप रैंकिंग वाले देशों में से एक है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी नए आंकड़ों के मुताबिक, 2022 के दौरान देश में विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में 1.55 लाख से ज्यादा लोगों की मौतें हुई हैं. देश में 3 मिनट के अंदर हर एक व्यक्ति की मौत सड़क दुर्घटना में हो जाती है. ऐसे में सड़क यात्रियों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है.

ग्लोबल NCAP चीफ ने क्या कहा?
इसी बीच ग्लोबल न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम यानी ग्लोबल एनसीएपी के अध्यक्ष ने कहा, “कारों के भारी, लम्बे और अधिक शक्तिशाली होने से दुर्घटना की स्थिति में घातक चोटें आने की संभावना अधिक होती है. ये बात डेविड वार्ड ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की साझेदारी और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक सहयोग से इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रैफिक एजुकेशन (IRTE) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित 3 दिवसीय ‘ग्लोबल रोड सेफ्टी इनिशिएटिव’ कार्यक्रम के दौरान कही.

उन्होंने साफ तौर पर कहा कि, “रोड एक्सीडेंट के मामले में टॉप लिस्ट में रहने वाले देश भारत को स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहनों (SUV) के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के रास्ते को अपनाने से बचना चाहिए क्योंकि वे अन्य छोटी कारों, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सड़कों को कम सुरक्षित बनाते हैं.” उन्होंने कहा कि, “अगर इंडियन ऑटो इंडस्ट्री एसयूवी के आकार और वजन के मामले में अमेरिकी उदाहरण का अनुसरण करता है तो यह एक बड़ी गलती होगी. हमारे क्लाइमेट टार्गेट्स और रोड सेफ्टी के लिए, वाहन का आकार पहले से कहीं अधिक मायने रखता है.”

एसयूवी पैदल यात्रियों के लिए खतरनाक
डेविड वार्ड ने चिंता जताते हुए कहा कि बड़ी गाड़ियां खासतौर से उनके लिए ये और फायदेमंद नहीं है जो एफिशिएंट ड्राइवर नहीं है. वाहन के बोनट की ऊंचाई एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि ऊंचे बोनट वाली कार से टकराने वाले पैदल यात्री या साइकिल चालक को निचले बोनट वाले वाहन की तुलना में 30% अधिक गंभीर चोट लगती है. उन्होंने सरकारों से बड़े आकार के वाहनों की बिक्री को सक्रिय रूप से हतोत्साहित करने का आग्रह किया. वार्ड ने सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए जीएनसीएपी के साथ साझेदारी में भारत एनसीएपी के विकास जैसे भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को स्वीकार किया, लेकिन बड़ी एसयूवी की बढ़ती लोकप्रियता से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

क्या कहते हैं बिक्री के आंकड़े
एसयूवी सेगमेंट की गाड़ियां तेजी से अपने पांव पसार रही हैं. कॉम्पैक्ट एसयूवी गाड़ियों की बिक्री इतनी जबर्दस्त तरीके से बढ़ी हैं कि दूसरी सेगमेंट की छोटी गाड़ियों और हैचबैक की बिक्री लगभग हाशिये पर आ गई है. भारत में बिकने वाली हर दूसरी कार एक एसयूवी है, इस वजह से अब ज्यादातर नई गाड़ियों को एसयूवी सेगमेंट में लॉन्च करने की होड़ सी लग गई है. देश में यात्री वाहनों की बिक्री में एसयूवी (यूटिलिटी वाहनों) की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है. इस बात का अंदाजा सिर्फ इससे लगाया जा सकता है कि नवंबर में कुल यात्री वाहनों की बिक्री में एसयूवी की हिस्सेदारी सितंबर में 51 प्रतिशत से बढ़कर, इस साल नवंबर में 53 प्रतिशत हो गया है.

Tags: Auto News, Cars, SUV

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